Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.24.34: जिनमें अभिमान का लेशमात्र भी अंश नहीं है, जो सब कुछ सहन कर लेते हैं, जिनके विचार दृढ़ हैं, जिन्होंने अपनी इन्द्रियों को वश में कर लिया है, जो सभी जीवों के प्रति दयालु हैं और जो सभी के प्रति मैत्रीपूर्ण व्यवहार रखते हैं, उन्हें दिया गया दान महान फल देता है। | mahabharat अध्याय 13.24: युधिष्ठिरके विविध धर्मयुक्त प्रश्नोंका उत्तर तथा श्राद्ध और दानके उत्तम पात्रोंका लक्षण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिनमें अभिमान का लेशमात्र भी अंश नहीं है, जो सब कुछ सहन कर लेते हैं, जिनके विचार दृढ़ हैं, जिन्होंने अपनी इन्द्रियों को वश में कर लिया है, जो सभी जीवों के प्रति दयालु हैं और जो सभी के प्रति मैत्रीपूर्ण व्यवहार रखते हैं, उन्हें दिया गया दान महान फल देता है।
Charity given to those who have no trace of pride, who tolerate everything, whose thoughts are firm, who have controlled their senses, who are benevolent to all living beings and who have friendly behavior towards all, yields great results.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥