Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.24.20: हे प्रभु! जो लोग इस पृथ्वी पर धर्म का गुणगान करते फिरते हैं, परन्तु स्वयं उस धर्म का आचरण नहीं करते, वे पाखण्डी हैं और धर्म-संकरता फैलाने में लगे रहते हैं॥20॥ | mahabharat अध्याय 13.24: युधिष्ठिरके विविध धर्मयुक्त प्रश्नोंका उत्तर तथा श्राद्ध और दानके उत्तम पात्रोंका लक्षण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये तु धर्मं प्रशंसन्तश्चरन्ति पृथिवीमिमाम्।
अनाचरन्तस्तद् धर्मं संकरेऽभिरता: प्रभो॥ २०॥
अनुवाद
हे प्रभु! जो लोग इस पृथ्वी पर धर्म का गुणगान करते फिरते हैं, परन्तु स्वयं उस धर्म का आचरण नहीं करते, वे पाखण्डी हैं और धर्म-संकरता फैलाने में लगे रहते हैं॥20॥
O Lord! Those who roam around on this earth praising religion but do not practice that religion themselves are hypocrites and are engaged in spreading religious hybridity. ॥20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥