Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.24.11: पृथ्वी कहती है: जैसे समुद्र में फेंका हुआ पत्थर पिघलकर तुरंत नष्ट हो जाता है, उसी प्रकार जो ब्राह्मण पूजा, अध्यापन और दान-ग्रहण - इन तीन कार्यों से जीविका चलाता है, वह अपने समस्त पाप कर्मों से मुक्त हो जाता है ॥11॥ | mahabharat अध्याय 13.24: युधिष्ठिरके विविध धर्मयुक्त प्रश्नोंका उत्तर तथा श्राद्ध और दानके उत्तम पात्रोंका लक्षण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पृथिव्युवाच
यथा महार्णवे क्षिप्त: क्षिप्रं लेष्टुर्विनश्यति।
तथा दुश्चरितं सर्वं त्रिवृत्यां च निमज्जति॥ ११॥
अनुवाद
पृथ्वी कहती है: जैसे समुद्र में फेंका हुआ पत्थर पिघलकर तुरंत नष्ट हो जाता है, उसी प्रकार जो ब्राह्मण पूजा, अध्यापन और दान-ग्रहण - इन तीन कार्यों से जीविका चलाता है, वह अपने समस्त पाप कर्मों से मुक्त हो जाता है ॥11॥
The Earth says: Just as a stone thrown into the ocean melts and gets destroyed immediately, in the same way, a Brahmin who earns his living by the three occupations of worship, teaching and receiving gifts, gets rid of all his evil deeds. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥