श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 23: मार्कण्डेयजीके द्वारा विविध प्रश्न और नारदजीके द्वारा उनका उत्तर  »  श्लोक d45
 
 
श्लोक  13.23.d45 
आमन्त्रयित्वा ऋषिभि: प्रययावाश्रमं मुनि:।
ऋषयश्चापि तीर्थानां परिचर्यां प्रचक्रमु:॥ )
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात ऋषियों से विदा लेकर मार्कण्डेय मुनि अपने आश्रम चले गये और वे ऋषि भी तीर्थयात्राओं पर भ्रमण करने लगे।
 
After that, taking leave from the sages, Markandeya Muni went to his ashram and those sages also started traveling on pilgrimages.
 
[दाक्षिणात्य अध्याय समाप्त]
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४६ श्लोक मिलाकर कुल ८७ श्लोक हैं, this chapter is split into 2 chapters, this and next)

 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas