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mahabharat 13.22.10: हे ब्रह्मर्षि अष्टावक्र! आप पुण्य कमाने के पीछे जाते हैं। और क्या सुनना चाहते हैं? मुझे बताइए, मैं आपको सब कुछ यथार्थ रूप में बताऊँगा॥10॥   |   mahabharat अध्याय 13.22: अष्टावक्र और उत्तरदिशाका संवाद, अष्टावक्रका अपने घर लौटकर वदान्य ऋषिकी कन्याके साथ विवाह करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.22.10 
गच्छस्व सुकृतं कृत्वा किं चान्यच्छ्रोतुमिच्छसि।
यावद् ब्रवीमि विप्रर्षे अष्टावक्र यथातथम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मर्षि अष्टावक्र! आप पुण्य कमाने के पीछे जाते हैं। और क्या सुनना चाहते हैं? मुझे बताइए, मैं आपको सब कुछ यथार्थ रूप में बताऊँगा॥10॥
 
O Brahmarshi Ashtavakra! You go after earning merits. What else do you want to hear? Tell me, I will tell you everything in its true form.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)