vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना
»
श्लोक 34-35h
श्लोक
13.2.34-35h
प्रतिजग्राह चाग्निस्तु राजकन्यां सुदर्शनाम्॥ ३४॥
विधिना वेददृष्टेन वसोर्धारामिवाध्वरे।
अनुवाद
अग्निदेव ने राजकुमारी सुदर्शन को उसी प्रकार स्वीकार किया जैसे वैदिक रीति से यज्ञ में वसुधारा को स्वीकार करते हैं ॥34 1/2॥
Agni accepted the princess Sudarshan in the same way as he accepts Vasudhara in a yagya according to the Vedic rituals. 34 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×