श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 2: प्रजापति मनुके वंशका वर्णन, अग्निपुत्र सुदर्शनका अतिथिसत्काररूपी धर्मके पालनसे मृत्युपर विजय पाना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  13.2.34-35h 
प्रतिजग्राह चाग्निस्तु राजकन्यां सुदर्शनाम्॥ ३४॥
विधिना वेददृष्टेन वसोर्धारामिवाध्वरे।
 
 
अनुवाद
अग्निदेव ने राजकुमारी सुदर्शन को उसी प्रकार स्वीकार किया जैसे वैदिक रीति से यज्ञ में वसुधारा को स्वीकार करते हैं ॥34 1/2॥
 
Agni accepted the princess Sudarshan in the same way as he accepts Vasudhara in a yagya according to the Vedic rituals. 34 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)