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श्लोक 13.19.3  |
लब्धवानीप्सितान् कामानहं वै पाण्डुनन्दन।
तथा त्वमपि शर्वाद्धि सर्वान् कामानवाप्स्यसि॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| पाण्डु नंदन! इसे पढ़कर मैंने अपनी सभी मनोकामनाएँ प्राप्त कर ली हैं। उसी प्रकार आप भी शंकर जी से अपनी सभी मनोकामनाएँ प्राप्त करेंगे।॥3॥ |
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| Pandu Nandan! By reading this I have achieved all my desired desires. In the same way you too will get all your desires from Shankar Ji.'॥ 3॥ |
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