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mahabharat 13.189.8-9h: हे जनेश्वर! भीष्म के प्राण उनके ब्रह्मरन्ध्र से निकलकर विशाल उल्कापिण्ड के समान आकाश में उड़ गए और क्षण भर में अदृश्य हो गए।   |   mahabharat अध्याय 13.189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  13.189.8-9h 
महोल्केव च भीष्मस्य मूर्धदेशाज्जनाधिप॥ ८॥
नि:सृत्याकाशमाविश्य क्षणेनान्तरधीयत।
 
 
अनुवाद
हे जनेश्वर! भीष्म के प्राण उनके ब्रह्मरन्ध्र से निकलकर विशाल उल्कापिण्ड के समान आकाश में उड़ गए और क्षण भर में अदृश्य हो गए।
 
O Janeshwar! Bhishma's soul came out of his Brahmarandhra and flew in the sky like a huge meteor and disappeared in a moment. 8 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)