Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.189.7-8h: उस समय देवताओं के नगाड़े बजने लगे और दिव्य पुष्पों की वर्षा होने लगी। सिद्ध और ब्रह्मऋषिगण अत्यंत प्रसन्न हुए और भीष्मजी की स्तुति करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 13.189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  13.189.7-8h 
देवदुन्दुभिनादश्च पुष्पवर्षै: सहाभवत्॥ ७॥
सिद्धा ब्रह्मर्षयश्चैव साधु साध्विति हर्षिता:।
 
 
अनुवाद
उस समय देवताओं के नगाड़े बजने लगे और दिव्य पुष्पों की वर्षा होने लगी। सिद्ध और ब्रह्मऋषिगण अत्यंत प्रसन्न हुए और भीष्मजी की स्तुति करने लगे।
 
At that time the drums of the gods started playing and divine flowers started raining down. The Siddhas and Brahmarishis were very happy. They started praising Bhishmaji. 7 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)