श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  13.189.32-33h 
स एष क्षत्रधर्मेण अयुध्यत रणाजिरे॥ ३२॥
धनंजयेन निहतो नैष देवि शिखण्डिना।
 
 
अनुवाद
देवि! उसने क्षत्रिय धर्म के अनुसार समरांगण में युद्ध किया था। वह अर्जुन के हाथों मारा गया, शिखंडी के हाथों नहीं। 32 1/2॥
 
Goddess! He fought in Samarangana according to Kshatriya Dharma. He was killed by the hand of Arjuna, not by the hand of Shikhandi. 32 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)