Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.189.31-32h: शोभने! वे अत्यन्त तेजस्वी वसु थे, वशिष्ठजी के शाप से उन्हें मनुष्य योनि में आना पड़ा। अतः उनके लिए शोक नहीं करना चाहिए। 31 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  13.189.31-32h 
वसुरेष महातेजा: शापदोषेण शोभने॥ ३१॥
मानुषत्वमनुप्राप्तो नैनं शोचितुमर्हसि।
 
 
अनुवाद
शोभने! वे अत्यन्त तेजस्वी वसु थे, वशिष्ठजी के शाप से उन्हें मनुष्य योनि में आना पड़ा। अतः उनके लिए शोक नहीं करना चाहिए। 31 1/2॥
 
Shobne! He was a very brilliant Vasu, due to the curse of Vashishthaji he had to come into human form. Therefore one should not mourn for them. 31 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)