श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  13.189.30-31h 
समाश्वसिहि भद्रे त्वं मा शुच: शुभदर्शने॥ ३०॥
गत: स परमं लोकं तव पुत्रो न संशय:।
 
 
अनुवाद
भद्रे! धैर्य रखो। शुभ हो! शोक मत करो। इसमें कोई संदेह नहीं है कि तुम्हारा पुत्र भीष्म बहुत अच्छे लोक में चला गया है। 30 1/2॥
 
Bhadre! Be patient. Good luck! Don't mourn. There is no doubt that your son Bhishma has gone to a very good world. 30 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)