Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.189.24-25h: भीष्म, जो महान व्रतों का पालन करने वाले, कुरुवंश के ज्येष्ठों का आदर करने वाले और परम पितृभक्त थे, इस प्रकार कहते हैं, "हाय! मेरा पराक्रमी पुत्र, जिसे पूर्वकाल में जमदग्निपुत्र परशुराम भी अपने दिव्यास्त्रों से नहीं हरा सके थे, अब शिखण्डी द्वारा मारा गया है। यह कितना दुःखद है॥ 24 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सत्कर्ता कुरुवृद्धानां पितृभक्तो महाव्रत:।
जामदग्न्येन रामेण य: पुरा न पराजित:॥ २४॥
दिव्यैरस्त्रैर्महावीर्य: स हतोऽद्य शिखण्डिना।
अनुवाद
भीष्म, जो महान व्रतों का पालन करने वाले, कुरुवंश के ज्येष्ठों का आदर करने वाले और परम पितृभक्त थे, इस प्रकार कहते हैं, "हाय! मेरा पराक्रमी पुत्र, जिसे पूर्वकाल में जमदग्निपुत्र परशुराम भी अपने दिव्यास्त्रों से नहीं हरा सके थे, अब शिखण्डी द्वारा मारा गया है। यह कितना दुःखद है॥ 24 1/2॥
Bheeshma, who was a follower of great vows, respected the elders of the Kuru clan and was a great devotee of his father. Alas! My mighty son, whom even Jamadagni's son Parashurama could not defeat with his divine weapons in the past, has now been killed by Shikhandi. How saddening is this.॥ 24 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥