Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.189.2: तत्पश्चात् वे धीरे-धीरे मन सहित प्राणवायु को भी भिन्न-भिन्न भावों में स्थापित करने लगे। इस प्रकार योगक्रिया द्वारा संयमित महात्मा भीष्मजी का प्राण क्रमशः ऊपर उठने लगा। 2॥   |   mahabharat अध्याय 13.189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.189.2 
धारयामास चात्मानं धारणासु यथाक्रमम्।
तस्योर्ध्वमगमन् प्राणा: संनिरुद्धा महात्मन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे धीरे-धीरे मन सहित प्राणवायु को भी भिन्न-भिन्न भावों में स्थापित करने लगे। इस प्रकार योगक्रिया द्वारा संयमित महात्मा भीष्मजी का प्राण क्रमशः ऊपर उठने लगा। 2॥
 
Thereafter, they gradually started establishing the vital air along with the mind in different concepts. In this way, the life of Mahatma Bhishmaji, which was restrained by the Yogic Kriya, started rising gradually. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)