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mahabharat 13.189.10-11: तत्पश्चात् बहुत-सी लकड़ियाँ और नाना प्रकार के सुगन्धित पदार्थ लेकर महाबली पाण्डवों, विदुर और युयुत्सु ने चिता तैयार की और शेष लोग एक ओर खड़े होकर देखते रहे॥10-11॥   |   mahabharat अध्याय 13.189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 189: भीष्मजीका प्राणत्याग, धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  13.189.10-11 
ततस्त्वादाय दारूणि गन्धांश्च विविधान् बहून्॥ १०॥
चितां चक्रुर्महात्मान: पाण्डवा विदुरस्तथा।
युयुत्सुश्चापि कौरव्य प्रेक्षकास्त्वितरेऽभवन्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् बहुत-सी लकड़ियाँ और नाना प्रकार के सुगन्धित पदार्थ लेकर महाबली पाण्डवों, विदुर और युयुत्सु ने चिता तैयार की और शेष लोग एक ओर खड़े होकर देखते रहे॥10-11॥
 
Thereafter, taking a lot of wood and various kinds of fragrant substances, the great Pandavas, Vidur and Yuyutsu prepared the funeral pyre and the rest of the people stood aside and kept watching.॥ 10-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)