| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 188: भीष्मके अन्त्येष्टि-संस्कारकी सामग्री लेकर युधिष्ठिर आदिका उनके पास जाना और भीष्मका श्रीकृष्ण आदिसे देहत्यागकी अनुमति लेते हुए धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरको कर्तव्यका उपदेश देना » श्लोक 7-8 |
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| | | | श्लोक 13.188.7-8  | घृतं माल्यं च गन्धांश्च क्षौमाणि च युधिष्ठिर:।
चन्दनागुरुमुख्यानि तथा कालीयकान्यपि॥ ७॥
प्रस्थाप्य पूर्वं कौन्तेयो भीष्मसंस्करणाय वै।
माल्यानि च वरार्हाणि रत्नानि विविधानि च॥ ८॥ | | | | | | अनुवाद | | कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर ने भीष्मजी का अन्तिम संस्कार करने के लिए घी, माला, गंध, रेशमी वस्त्र, चन्दन, अगुरु, काला चन्दन, कुलीन पुरुषों के पहनने योग्य मालाएँ और नाना प्रकार के रत्न पहले ही भेज दिए थे ॥7-8॥ | | | | Kuntinandan Yudhishthir had already sent ghee, garlands, scent, silk clothes, sandalwood, aguru, black sandalwood, garlands suitable for a noble man to wear and various types of gems to perform the last rites of Bhishmaji. 7-8॥ | | ✨ ai-generated | | |
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