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mahabharat 13.188.47: राजर्षे! आप अपने पिता के प्रति अन्य मार्कण्डेय के समान ही समर्पित हैं; इसीलिए मृत्यु भी आज्ञाकारी दासी के समान आपके वश में हो गई है। 47॥   |   mahabharat अध्याय 13.188: भीष्मके अन्त्येष्टि-संस्कारकी सामग्री लेकर युधिष्ठिर आदिका उनके पास जाना और भीष्मका श्रीकृष्ण आदिसे देहत्यागकी अनुमति लेते हुए धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरको कर्तव्यका उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 188: भीष्मके अन्त्येष्टि-संस्कारकी सामग्री लेकर युधिष्ठिर आदिका उनके पास जाना और भीष्मका श्रीकृष्ण आदिसे देहत्यागकी अनुमति लेते हुए धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरको कर्तव्यका उपदेश देना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  13.188.47 
पितृभक्तोऽसि राजर्षे मार्कण्डेय इवापर:।
तेन मृत्युस्तव वशे स्थितो भृत्य इवानत:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
राजर्षे! आप अपने पिता के प्रति अन्य मार्कण्डेय के समान ही समर्पित हैं; इसीलिए मृत्यु भी आज्ञाकारी दासी के समान आपके वश में हो गई है। 47॥
 
Rajarshe! You are as devoted to your father as the other Markandeya; That is why death has become under your control like a submissive maid. 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)