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mahabharat 13.188.45: श्री कृष्ण! अब मुझे आज्ञा दीजिए, मैं इस शरीर का त्याग कर दूँगा। आपकी आज्ञा पाकर मैं परम मोक्ष को प्राप्त हो जाऊँगा ॥ 45॥   |   mahabharat अध्याय 13.188: भीष्मके अन्त्येष्टि-संस्कारकी सामग्री लेकर युधिष्ठिर आदिका उनके पास जाना और भीष्मका श्रीकृष्ण आदिसे देहत्यागकी अनुमति लेते हुए धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरको कर्तव्यका उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 188: भीष्मके अन्त्येष्टि-संस्कारकी सामग्री लेकर युधिष्ठिर आदिका उनके पास जाना और भीष्मका श्रीकृष्ण आदिसे देहत्यागकी अनुमति लेते हुए धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरको कर्तव्यका उपदेश देना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  13.188.45 
स मां त्वमनुजानीहि कृष्ण मोक्ष्ये कलेवरम्।
त्वयाहं समनुज्ञातो गच्छेयं परमां गतिम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! अब मुझे आज्ञा दीजिए, मैं इस शरीर का त्याग कर दूँगा। आपकी आज्ञा पाकर मैं परम मोक्ष को प्राप्त हो जाऊँगा ॥ 45॥
 
Sri Krishna! Now give me your permission, I will give up this body. On receiving your permission, I will attain the ultimate salvation. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)