श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 188: भीष्मके अन्त्येष्टि-संस्कारकी सामग्री लेकर युधिष्ठिर आदिका उनके पास जाना और भीष्मका श्रीकृष्ण आदिसे देहत्यागकी अनुमति लेते हुए धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरको कर्तव्यका उपदेश देना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  13.188.30 
भीष्म उवाच
राजन् विदितधर्मोऽसि सुनिर्णीतार्थसंशय:।
बहुश्रुता हि ते विप्रा बहव: पर्युपासिता:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - राजन! आप धर्म को भली-भाँति जानते हैं। आपने विषय का अर्थ भी भली-भाँति निश्चित कर लिया है। अब आपके मन में कोई संशय नहीं है; क्योंकि आपने अनेक शास्त्रों के ज्ञाता विद्वान ब्राह्मणों की सेवा की है - उनकी संगति से आपको लाभ हुआ है।
 
Bhishmaji said - King! You know the Dharma very well. You have also decided the meaning of the matter very well. Now there is no doubt in your mind; because you have served many learned Brahmins who have knowledge of many scriptures - you have benefited from their company.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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