श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 188: भीष्मके अन्त्येष्टि-संस्कारकी सामग्री लेकर युधिष्ठिर आदिका उनके पास जाना और भीष्मका श्रीकृष्ण आदिसे देहत्यागकी अनुमति लेते हुए धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरको कर्तव्यका उपदेश देना  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  13.188.3-4 
सोऽभिषिक्तो महाप्राज्ञ: प्राप्य राज्यं युधिष्ठिर:।
अवस्थाप्य नरश्रेष्ठ: सर्वा: स्वप्रकृतीस्तथा॥ ३॥
द्विजेभ्यो गुणमुख्येभ्यो नैगमेभ्यश्च सर्वश:।
प्रतिगृह्याशिषो मुख्यास्तथा धर्मभृतां वर:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्माओं में श्रेष्ठ और परम ज्ञानी युधिष्ठिर ने राज्य पाकर मन्त्री आदि सब लोगों को अपने-अपने पदों पर नियुक्त किया और वेदवेत्ताओं एवं गुणवान ब्राह्मणों से उत्तम आशीर्वाद प्राप्त किया॥3-4॥
 
After getting his kingdom, Yudhishthir, the most knowledgeable and the best among the religious souls, after getting his kingdom, installed all the people like ministers etc. on their respective posts and received the best blessings from the Veda experts and virtuous Brahmins. 3-4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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