श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 188: भीष्मके अन्त्येष्टि-संस्कारकी सामग्री लेकर युधिष्ठिर आदिका उनके पास जाना और भीष्मका श्रीकृष्ण आदिसे देहत्यागकी अनुमति लेते हुए धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरको कर्तव्यका उपदेश देना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  13.188.29 
एवमुक्त्वा तु गाङ्गेयो धर्मपुत्रं युधिष्ठिरम्।
धृतराष्ट्रमथामन्त्र्य काले वचनमब्रवीत्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
धर्मपुत्र युधिष्ठिर से ऐसा कहकर गंगानन्दन भीष्म ने धृतराष्ट्र को बुलाकर उनसे ये समयोचित वचन कहे-॥29॥
 
Saying this to Dharma's son Yudhishthira, Ganganandan Bhishma called Dhritarashtra and said to him these timely words -॥ 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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