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mahabharat 13.188.27: इस तीक्ष्ण बाणों की शय्या पर सोते हुए मुझे 58 दिन हो गए हैं; परन्तु ये दिन मुझे सौ वर्षों के समान प्रतीत हो रहे हैं॥27॥   |   mahabharat अध्याय 13.188: भीष्मके अन्त्येष्टि-संस्कारकी सामग्री लेकर युधिष्ठिर आदिका उनके पास जाना और भीष्मका श्रीकृष्ण आदिसे देहत्यागकी अनुमति लेते हुए धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरको कर्तव्यका उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 188: भीष्मके अन्त्येष्टि-संस्कारकी सामग्री लेकर युधिष्ठिर आदिका उनके पास जाना और भीष्मका श्रीकृष्ण आदिसे देहत्यागकी अनुमति लेते हुए धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरको कर्तव्यका उपदेश देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.188.27 
अष्टपञ्चाशतं रात्र्य: शयानस्याद्य मे गता:।
शरेषु निशिताग्रेषु यथा वर्षशतं तथा॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इस तीक्ष्ण बाणों की शय्या पर सोते हुए मुझे 58 दिन हो गए हैं; परन्तु ये दिन मुझे सौ वर्षों के समान प्रतीत हो रहे हैं॥27॥
 
It has been 58 days since I have been sleeping on this bed of sharp arrows; but these days seem like a hundred years to me.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)