Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.184.1: युधिष्ठिर बोले - पितामह! भाग्यहीन मनुष्य बलवान होने पर भी धन नहीं पाता और भाग्यवान मनुष्य बालक और दुर्बल होने पर भी बहुत-सा धन पाता है॥1॥   |   mahabharat अध्याय 13.184: युधिष्ठिरका विद्या, बल और बुद्धिकी अपेक्षा भाग्यकी प्रधानता बताना और भीष्मजीद्वारा उसका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 184: युधिष्ठिरका विद्या, बल और बुद्धिकी अपेक्षा भाग्यकी प्रधानता बताना और भीष्मजीद्वारा उसका उत्तर  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.184.1 
युधिष्ठिर उवाच
नाभागधेय: प्राप्नोति धनं सुबलवानपि।
भागधेयान्वितस्त्वर्थान् कृशो बालश्च विन्दति॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - पितामह! भाग्यहीन मनुष्य बलवान होने पर भी धन नहीं पाता और भाग्यवान मनुष्य बालक और दुर्बल होने पर भी बहुत-सा धन पाता है॥1॥
 
Yudhishthira said - Grandfather! An unlucky man does not get wealth even if he is strong and a fortunate man, even if he is a child and weak, gets a lot of wealth. ॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)