श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  13.183.52 
न जातु त्वमिति ब्रूयादापन्नोऽपि महत्तरम्।
त्वंकारो वा वधो वेति विद्वत्सु न विशिष्यते॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! बड़े से बड़े संकट में भी किसी महापुरुष के विरुद्ध 'तुम' शब्द का प्रयोग नहीं करना चाहिए। किसी को 'तुम' कहना या उसका वध करना - विद्वान पुरुष इन दोनों में कोई अंतर नहीं मानते ॥ 52॥
 
Yudhishthira! Even in the greatest of troubles, you should never use the word 'you' against a great man. Calling someone 'you' or killing him - learned men do not consider there to be any difference between the two. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)