श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  13.183.46 
न नग्नामीक्षते नारीं न नग्नान् पुरुषानपि।
मैथुनं सततं गुप्तमाहारं च समाचरेत्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
नंगी स्त्री को न देखो, न नंगे पुरुष को देखो। हमेशा एकांत स्थान पर ही भोजन करो और संभोग करो। 46.
 
Do not look at a naked woman, nor should you look at naked men. Always have sex and eat in a secluded place. 46.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)