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mahabharat 13.183.41: जैसे होम काल में अग्निदेव होम की प्रतीक्षा करते हैं, वैसे ही रजस्वला काल में स्त्री अपने रजस्वला काल की प्रतीक्षा करती है ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 13.183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  13.183.41 
होमकाले यथा वह्नि: कालमेव प्रतीक्षते।
ऋतुकाले तथा नारी ऋतुमेव प्रतीक्षते॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
जैसे होम काल में अग्निदेव होम की प्रतीक्षा करते हैं, वैसे ही रजस्वला काल में स्त्री अपने रजस्वला काल की प्रतीक्षा करती है ॥ 41॥
 
Just as during the homa period the fire god waits for the homa, similarly during the menstrual period a woman waits for her menstrual period. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)