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mahabharat 13.183.39-40: एक अच्छे मनुष्य को सभी अतिथियों, सेवकों, सम्बन्धियों और शरणार्थियों की रक्षा और सत्कार करना चाहिए। देवताओं ने मनुष्यों के लिए दिन में केवल दो बार, प्रातः और सायं, भोजन करने का विधान किया है। इस बीच में भोजन करने की विधि का विचार नहीं किया गया है। इस नियम का पालन करने से व्रत का फल प्राप्त होता है। 39-40.   |   mahabharat अध्याय 13.183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.183.39-40 
अतिथीनां च सर्वेषां प्रेष्याणां स्वजनस्य च।
तथा शरणकामानां गोप्ता स्यात् स्वागतप्रद:॥ ३९॥
सायंप्रातर्मनुष्याणामशनं देवनिर्मितम्।
नान्तरा भोजनं दृष्टमुपवासविधिर्हि स:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
एक अच्छे मनुष्य को सभी अतिथियों, सेवकों, सम्बन्धियों और शरणार्थियों की रक्षा और सत्कार करना चाहिए। देवताओं ने मनुष्यों के लिए दिन में केवल दो बार, प्रातः और सायं, भोजन करने का विधान किया है। इस बीच में भोजन करने की विधि का विचार नहीं किया गया है। इस नियम का पालन करने से व्रत का फल प्राप्त होता है। 39-40.
 
A good man should protect and welcome all guests, servants, relatives and refugees. The gods have prescribed for humans to eat only two times a day, in the morning and in the evening. The method of eating in between is not considered. By following this rule, one gets the result of fasting. 39-40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)