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mahabharat 13.183.34: भीष्म बोले, "युधिष्ठिर! असाधु अर्थात दुष्ट पुरुष दुराचारी, अभिमानी और क्रोधी होते हैं, जबकि पुण्यात्मा पुरुष सदाचारी होते हैं। अब शिष्टाचार के लक्षण बताए जा रहे हैं॥ 34॥   |   mahabharat अध्याय 13.183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  13.183.34 
भीष्म उवाच
दुराचाराश्च दुर्धर्षा दुर्मुखाश्चाप्यसाधव:।
साधव: शीलसम्पन्ना: शिष्टाचारस्य लक्षणम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "युधिष्ठिर! असाधु अर्थात दुष्ट पुरुष दुराचारी, अभिमानी और क्रोधी होते हैं, जबकि पुण्यात्मा पुरुष सदाचारी होते हैं। अब शिष्टाचार के लक्षण बताए जा रहे हैं॥ 34॥
 
Bhishma said, "Yudhishthira! Asadhu or evil men are immoral, arrogant and ill-tempered, whereas virtuous men are well behaved. Now the signs of etiquette are being described.॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)