Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.183.31: चाहे मनुष्य हों या देवता, जो शारीरिक कष्ट सहकर भी धर्म के मार्ग पर चलते रहते हैं और लोभ-द्वेष का त्याग कर देते हैं, वे सुखी होते हैं ॥31॥ | mahabharat अध्याय 13.183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनुष्या यदि वा देवा: शरीरमुपताप्य वै।
धर्मिण: सुखमेधन्ते लोभद्वेषविवर्जिता:॥ ३१॥
अनुवाद
चाहे मनुष्य हों या देवता, जो शारीरिक कष्ट सहकर भी धर्म के मार्ग पर चलते रहते हैं और लोभ-द्वेष का त्याग कर देते हैं, वे सुखी होते हैं ॥31॥
Be it human beings or gods, those who persist in following the path of righteousness even at the cost of physical suffering and who give up greed and hatred, are happy. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥