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mahabharat 13.182.7: जो सबको जला देता है, अत्यंत तेजवान, भयंकर और तेजस्वी है, तथा प्रलयंकारी अग्नि रूपी मांस, रक्त और मज्जा को भी भस्म कर देता है, इसलिए उसे 'रुद्र' कहा गया है।   |   mahabharat अध्याय 13.182: भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 182: भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.182.7 
यन्निर्दहति यत्तीक्ष्णो यदुग्रो यत् प्रतापवान्।
मांसशोणितमज्जादो यत् ततो रुद्र उच्यते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जो सबको जला देता है, अत्यंत तेजवान, भयंकर और तेजस्वी है, तथा प्रलयंकारी अग्नि रूपी मांस, रक्त और मज्जा को भी भस्म कर देता है, इसलिए उसे 'रुद्र' कहा गया है।
 
He who burns everyone, is extremely sharp, fierce and majestic, and consumes even the flesh, blood and marrow in the form of the fire of destruction, is therefore called 'Rudra'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)