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mahabharat 13.182.4: उनका भयंकर रूप भय उत्पन्न करने वाला है। अग्नि, विद्युत और सूर्य आदि अनेक रूप उनके हैं। इसके अतिरिक्त शिव नाम वाला रूप अत्यंत शान्त और मंगलमय है। धर्म, जल और चन्द्रमा आदि अनेक रूप उनके हैं॥ 4॥   |   mahabharat अध्याय 13.182: भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 182: भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.182.4 
उग्रा घोरा तनुर्यास्य सोऽग्निर्विद्युत् स भास्कर:।
शिवा सौम्या च या त्वस्य धर्मस्त्वापोऽथ चन्द्रमा:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उनका भयंकर रूप भय उत्पन्न करने वाला है। अग्नि, विद्युत और सूर्य आदि अनेक रूप उनके हैं। इसके अतिरिक्त शिव नाम वाला रूप अत्यंत शान्त और मंगलमय है। धर्म, जल और चन्द्रमा आदि अनेक रूप उनके हैं॥ 4॥
 
His fierce form is fear-inducing. He has many forms like fire, electricity and sun. Apart from this, the form named Shiva is extremely peaceful and auspicious. He has many forms like Dharma, water and moon.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)