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mahabharat 13.182.25: वे देवताओं में प्रधान हैं। उन्होंने अपने मुख से अग्नि उत्पन्न की है। वे नाना प्रकार के ग्रह-संकटों से पीड़ित प्राणियों को मुक्ति प्रदान करते हैं॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 13.182: भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 182: भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.182.25 
प्रथमो ह्येष देवानां मुखादग्निमजीजनत्।
ग्रहैर्बहुविधै: प्राणान् संरुद्धानुत्सृजत्यपि॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वे देवताओं में प्रधान हैं। उन्होंने अपने मुख से अग्नि उत्पन्न की है। वे नाना प्रकार के ग्रह-संकटों से पीड़ित प्राणियों को मुक्ति प्रदान करते हैं॥ 25॥
 
He is the chief among the gods. He has produced fire from his mouth. He relieves the beings suffering from various kinds of planetary troubles.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)