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mahabharat 13.182.14: वे पशुओं का हर संभव तरीके से ध्यान रखते हैं, उनके साथ रहकर आनंद लेते हैं और पशुओं के स्वामी हैं। इसीलिए उन्हें 'पशुपति' कहा जाता है। 14.   |   mahabharat अध्याय 13.182: भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.182.14 
सर्वथा यत् पशून् पाति तैश्च यद् रमते सह।
तेषामधिपतिर्यच्च तस्मात् पशुपति: स्मृत:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वे पशुओं का हर संभव तरीके से ध्यान रखते हैं, उनके साथ रहकर आनंद लेते हैं और पशुओं के स्वामी हैं। इसीलिए उन्हें 'पशुपति' कहा जाता है। 14.
 
He takes care of animals in every possible way, enjoys living with them and is the lord of animals. That is why he is called 'Pashupati'. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)