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mahabharat 13.181.9: युद्ध में बादलों की गर्जना के समान उसकी गर्जना देवताओं के हृदय को भी भेद सकती है।   |   mahabharat अध्याय 13.181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.181.9 
घोरं च निनदं तस्य पर्जन्यनिनदोपमम्।
श्रुत्वा विशीर्येद् हृदयं देवानामपि संयुगे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में बादलों की गर्जना के समान उसकी गर्जना देवताओं के हृदय को भी भेद सकती है।
 
His roar, as deep as the roar of clouds in a battle, can pierce the hearts of even the gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)