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mahabharat 13.181.8: जब वह युद्ध में क्रोधित हो जाता है, तब उसकी गंध मात्र से ही उसके सभी शत्रु काँप उठते हैं और मूर्छित होकर गिर पड़ते हैं, और लगभग मृत हो जाते हैं ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 13.181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.181.8 
गन्धेनापि हि संग्रामे तस्य क्रुद्धस्य शत्रव:।
विसंज्ञा हतभूयिष्ठा वेपन्ते च पतन्ति च॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जब वह युद्ध में क्रोधित हो जाता है, तब उसकी गंध मात्र से ही उसके सभी शत्रु काँप उठते हैं और मूर्छित होकर गिर पड़ते हैं, और लगभग मृत हो जाते हैं ॥8॥
 
When he becomes enraged during a battle, his smell alone makes all his enemies tremble and fall down, unconscious and almost dead. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)