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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन
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श्लोक 41
श्लोक
13.181.41
मासार्धमासा ऋतव: संध्ये संवत्सरश्च स:।
स धाता स विधाता च विश्वकर्मा स सर्ववित्॥ ४१॥
अनुवाद
वह मास, पक्ष, ऋतु, संध्या और संवत्सर है। वह सृष्टिकर्ता, सृष्टिकर्ता, विश्वकर्मा और सर्वज्ञ है ॥41॥
He is the month, the fortnight, the season, the evening and the Samvatsara. He is the creator, the creator, the Vishwakarma and the omniscient. ॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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