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रुद्रस्य भागं यज्ञे च विशिष्टं ते त्वकल्पयन्।
भयेन त्रिदशा राजन् शरणं च प्रपेदिरे॥ २३॥
अनुवाद
राजन! देवतागण भयभीत होकर भगवान शंकर की शरण में गए और उन्होंने यज्ञ में रुद्र के लिए विशेष भाग की कल्पना की (यज्ञ से बची हुई सारी सामग्री रुद्र को सौंप दी गई)॥23॥
Rajan! The gods took refuge in Lord Shankar out of fear. He imagined a special share for Rudra in the yagya (all the material left over from the yagya was handed over to Rudra). 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥