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mahabharat 13.181.17: अपने सहित सम्पूर्ण भूतों का भी कल्याण चाहने वाले वे मुनि अत्यन्त भयभीत हो गए और शान्ति तथा आशीर्वाद आदि कृत्य करने लगे ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 13.181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.181.17 
भृशं भीतास्तत: शान्तिं चक्रु: स्वस्त्ययनानि च।
ऋषय: सर्वभूतानामात्मनश्च हितैषिण:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
अपने सहित सम्पूर्ण भूतों का भी कल्याण चाहने वाले वे मुनि अत्यन्त भयभीत हो गए और शान्ति तथा आशीर्वाद आदि कृत्य करने लगे ॥17॥
 
The sage, who wanted the welfare of all the ghosts as well as his own, became extremely frightened and started performing acts of peace and blessings etc. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)