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mahabharat 13.181.10-11h: पिनाक धारण करने वाले रुद्र जब किसी को भयानक दृष्टि से देखेंगे, तो उसका हृदय टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा। भगवान शंकर जब क्रोधित हो जाते हैं, तो देवता, दानव, गंधर्व और नाग भी भागकर गुफाओं में छिपने पर भी सुख से नहीं रह सकते।   |   mahabharat अध्याय 13.181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  13.181.10-11h 
यांश्च घोरेण रूपेण पश्येत् क्रुद्ध: पिनाकधृत्।
न सुरा नासुरा लोके न गन्धर्वा न पन्नगा:॥ १०॥
कुपिते सुखमेधन्ते तस्मिन्नपि गुहागता:।
 
 
अनुवाद
पिनाक धारण करने वाले रुद्र जब किसी को भयानक दृष्टि से देखेंगे, तो उसका हृदय टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा। भगवान शंकर जब क्रोधित हो जाते हैं, तो देवता, दानव, गंधर्व और नाग भी भागकर गुफाओं में छिपने पर भी सुख से नहीं रह सकते।
 
When Rudra wielding Pinaka looks at someone in a terrifying manner, his heart will be torn into pieces. When Lord Shankar becomes angry, even the gods, demons, Gandharvas and serpents cannot live happily even if they run away and hide in caves. 10 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)