Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.180.6-8h: महाराज! जब प्रद्युम्न ने ऐसा कहा, तब मैंने उसे उत्तर दिया। रुक्मिणीनंदन! मैं तुम्हें ब्राह्मणों की पूजा करने का क्या लाभ है, यह बता रहा हूँ, तुम ध्यानपूर्वक सुनो। पुत्र! ब्राह्मणों का राजा सोम (चन्द्रमा) है। अतः वह इस लोक में तथा परलोक में भी सुख-दुःख देने में समर्थ है। 6-7 1/2। | mahabharat अध्याय 13.180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इत्युक्ते वचने तस्मिन् प्रद्युम्नेन तथा त्वहम्।
प्रत्यब्रुवं महाराज यत् तच्छृणु समाहित:॥ ६॥
व्युष्टिं ब्राह्मणपूजायां रौक्मिणेय निबोध मे।
एते हि सोमराजान ईश्वरा: सुखदु:खयो:॥ ७॥
अस्मिँल्लोके रौक्मिणेय तथामुष्मिंश्च पुत्रक।
अनुवाद
महाराज! जब प्रद्युम्न ने ऐसा कहा, तब मैंने उसे उत्तर दिया। रुक्मिणीनंदन! मैं तुम्हें ब्राह्मणों की पूजा करने का क्या लाभ है, यह बता रहा हूँ, तुम ध्यानपूर्वक सुनो। पुत्र! ब्राह्मणों का राजा सोम (चन्द्रमा) है। अतः वह इस लोक में तथा परलोक में भी सुख-दुःख देने में समर्थ है। 6-7 1/2।
Maharaj! When Pradyumna said this, I replied to him. Rukmini Nandan! I am telling you what is the benefit of worshipping Brahmins, you listen with full attention. Son! The king of Brahmins is Som (Moon). Hence, he is capable of giving happiness and sorrow in this world as well as in the next world. 6-7 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥