श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना  »  श्लोक 40-41
 
 
श्लोक  13.180.40-41 
यावच्च पुण्या लोकेषु त्वयि कीर्तिर्भविष्यति॥ ४०॥
त्रिषु लोकेषु तावच्च वैशिष्टॺं प्रतिपत्स्यसे।
सुप्रिय: सर्वलोकस्य भविष्यसि जनार्दन॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
‘जब तक तीनों लोकों में आपकी पुण्य कीर्ति रहेगी, तब तक आप तीनों लोकों में प्रधान रहेंगे। जनार्दन! आप सब लोगों में सबसे प्रिय होंगे। ॥40-41॥
 
‘As long as your pious fame lasts in the three worlds, you will remain the chief in the three worlds. Janardan! You will be the most beloved of all people. ॥ 40-41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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