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mahabharat 13.180.4: मधुसूदन! ब्राह्मणों की पूजा करने से क्या लाभ है? इस लोक और परलोक में उन्हें भगवान के समान क्यों माना जाता है?॥4॥   |   mahabharat अध्याय 13.180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.180.4 
किं फलं ब्राह्मणेष्वस्ति पूजायां मधुसूदन।
ईश्वरत्वं कुतस्तेषामिहैव च परत्र च॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! ब्राह्मणों की पूजा करने से क्या लाभ है? इस लोक और परलोक में उन्हें भगवान के समान क्यों माना जाता है?॥4॥
 
‘Madhusudana! What is the benefit of worshipping Brahmins? Why are they considered equal to God in this world and the next?॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)