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mahabharat 13.180.36: इस प्रकार बिना मार्ग के दौड़ता हुआ मैं शरीर पर खीर मलकर महाबली ब्राह्मण दुर्वासा के पीछे दौड़ने लगा और बोला, 'हे प्रभु! आप प्रसन्न हों।'   |   mahabharat अध्याय 13.180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.180.36 
तमुत्पथेन धावन्तमन्वधावं द्विजोत्तमम्।
तथैव पायसादिग्ध: प्रसीद भगवन्निति॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार बिना मार्ग के दौड़ता हुआ मैं शरीर पर खीर मलकर महाबली ब्राह्मण दुर्वासा के पीछे दौड़ने लगा और बोला, 'हे प्रभु! आप प्रसन्न हों।'
 
In this manner, running without any path, I started running behind the great Brahmin Durvasa, with kheer smeared all over my body and said, 'O Lord! Please be pleased.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)