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mahabharat 13.180.29: वे बुद्धिमान ब्राह्मण दुर्वासा अपने तेज से अग्नि के समान चमक रहे थे। मेरे सामने ही उन्होंने निरपराध रुक्मिणी को चाबुक से ऐसे मारना आरम्भ किया, जैसे रथ के घोड़ों को चाबुक से मारा जाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.180.29 
अग्निवर्णो ज्वलन् धीमान् स द्विजो रथधुर्यवत्।
प्रतोदेनातुदद् बालां रुक्मिणीं मम पश्यत:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
वे बुद्धिमान ब्राह्मण दुर्वासा अपने तेज से अग्नि के समान चमक रहे थे। मेरे सामने ही उन्होंने निरपराध रुक्मिणी को चाबुक से ऐसे मारना आरम्भ किया, जैसे रथ के घोड़ों को चाबुक से मारा जाता है।
 
That wise Brahmin Durvasa was shining like fire with his brilliance. In front of me he started hitting the innocent Rukmini with the whip just as the horses of a chariot are whipped.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)