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mahabharat 13.180.27: तभी उन्होंने देखा कि आपकी सुमुखी माता पास ही खड़ी होकर मुस्कुरा रही हैं। ऋषि की आज्ञा पाकर मैंने मुस्कुराती हुई माता के शरीर पर खीर का लेप किया।   |   mahabharat अध्याय 13.180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.180.27 
स ददर्श तदाभ्याशे मातरं ते शुभाननाम्।
तामपि स्मयमानां स पायसेनाभ्यलेपयम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तभी उन्होंने देखा कि आपकी सुमुखी माता पास ही खड़ी होकर मुस्कुरा रही हैं। ऋषि की आज्ञा पाकर मैंने मुस्कुराती हुई माता के शरीर पर खीर का लेप किया।
 
Just then he saw that your Sumukhi mother was standing nearby and smiling. After getting the sage's permission, I smeared the smiling mother's body with kheer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)