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mahabharat 13.180.26: मैंने बिना सोचे-समझे उसकी आज्ञा मान ली और वही बासी खीर अपने सिर और शरीर के बाकी हिस्सों पर मल ली।   |   mahabharat अध्याय 13.180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.180.26 
अविमृश्यैव च तत: कृतवानस्मि तत् तथा।
तेनोच्छिष्टेन गात्राणि शिरश्चैवाभ्यमृक्षयम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
मैंने बिना सोचे-समझे उसकी आज्ञा मान ली और वही बासी खीर अपने सिर और शरीर के बाकी हिस्सों पर मल ली।
 
I obeyed his orders without thinking. I smeared the same stale kheer on my head and all other body parts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)