श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.180.2 
वासुदेव उवाच
शृणुष्वावहितो राजन् द्विजानां भरतर्षभ।
यथा तत्त्वेन वदतो गुणान् वै कुरुसत्तम॥ २॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण बोले - कुरुकुल तिलक भारतभूषण राजा! मैं ब्राह्मणों के गुणों का यथार्थ वर्णन करता हूँ, तुम ध्यानपूर्वक सुनो॥2॥
 
Lord Shri Krishna said – Kurukula Tilak Bharatbhushan King! I describe the qualities of Brahmins accurately, you listen carefully. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)