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mahabharat 13.180.17-18h: यदि मैं थोड़ा-सा भी अपराध करूँ, तो मुझे समस्त प्राणियों पर अत्यंत क्रोध आता है। मेरी वाणी सुनकर मुझे रहने के लिए कौन स्थान देगा? जो मुझे अपने घर में रहने के लिए स्थान दे, उसे मुझे क्रोधित नहीं करना चाहिए। उसे इस विषय में सदैव सावधान रहना होगा।'॥17 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  13.180.17-18h 
रोषण: सर्वभूतानां सूक्ष्मेऽप्यपकृते कृते।
परिभाषां च मे श्रुत्वा को नु दद्यात् प्रतिश्रयम्॥ १७॥
यो मां कश्चिद् वासयीत न स मां कोपयेदिति।
 
 
अनुवाद
यदि मैं थोड़ा-सा भी अपराध करूँ, तो मुझे समस्त प्राणियों पर अत्यंत क्रोध आता है। मेरी वाणी सुनकर मुझे रहने के लिए कौन स्थान देगा? जो मुझे अपने घर में रहने के लिए स्थान दे, उसे मुझे क्रोधित नहीं करना चाहिए। उसे इस विषय में सदैव सावधान रहना होगा।'॥17 1/2॥
 
‘If I commit even a small crime, I become extremely angry with all living beings. Who will give me a place to stay after listening to my speech? Whoever gives me a place to stay in his house should not make me angry. He will have to be always cautious about this.'॥ 17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)