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mahabharat 13.180.12: ब्राह्मण इस लोक में भी महान माने जाते हैं और परलोक में भी। वे सब कुछ प्रत्यक्ष देखते हैं और यदि वे क्रोधित हो जाएँ, तो इस लोक का विनाश कर सकते हैं।॥12॥   |   mahabharat अध्याय 13.180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.180.12 
ब्राह्मणा हि महद्भूतमस्मिँल्लोके परत्र च।
भस्म कुर्युर्जगदिदं क्रुद्धा: प्रत्यक्षदर्शिन:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण इस लोक में भी महान माने जाते हैं और परलोक में भी। वे सब कुछ प्रत्यक्ष देखते हैं और यदि वे क्रोधित हो जाएँ, तो इस लोक का विनाश कर सकते हैं।॥12॥
 
Brahmins are considered great in this world as well as the next. They see everything directly and if they become angry, they can destroy this world.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)