श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.180.1 
युधिष्ठिर उवाच
ब्रूहि ब्राह्मणपूजायां व्युष्टिं त्वं मधुसूदन।
वेत्ता त्वमस्य चार्थस्य वेद त्वां हि पितामह:॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - मधुसूदन ! ब्राह्मण की पूजा करने से क्या लाभ होता है ? आप कृपा करके मुझे यह बताइए, क्योंकि आप इस विषय को भली-भाँति जानते हैं और मेरे पितामह भी आपको इस विषय में निपुण मानते हैं ॥ 1॥
 
Yudhishthira asked - Madhusudan! What is the benefit of worshipping a Brahmin? You please tell me about it because you know this subject very well and my grandfather also considers you to be an expert in this subject.॥ 1॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas